E20 Petrol Protest: Tehseen Poonawalla का बड़ा ऐलान, Jantar Mantar से Gadkari House तक पहुंच सकता है विरोध, जानिए पूरा मामला

E20 Petrol को लेकर अब सड़क पर उतर रहा है विरोध

भारत में इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की बिक्री को लेकर पहली बार सड़क पर विरोध प्रदर्शन होने जा रहा है। तहसीन पूनावाला ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन किसी राजनीतिक पार्टी या राजनीतिक ताकत की तरफ़ से नहीं, बल्कि आम गाड़ी मालिकों की तरफ़ से आयोजित किया जा रहा है, जिनका मानना है कि सरकार की इथेनॉल पॉलिसी का उनकी कारों पर बुरा असर पड़ा है।


प्रदर्शनकारियों की आपत्ति क्या है?

पूनावाला ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की केंद्र सरकार से तीन मुख्य मांगें हैं। पहली, वे चाहते हैं कि सरकार E20 ब्लेंडिंग से जुड़े सभी पॉलिसी डॉक्यूमेंट और टेक्निकल स्टडीज़ जनता के सामने रखे। दूसरी, वे मांग कर रहे हैं कि ग्राहकों को अलग-अलग तरह के फ़्यूल विकल्प दिए जाएं, जिनमें इथेनॉल-फ़्री पेट्रोल और कम इथेनॉल ब्लेंड वाले फ़्यूल जैसे E5 और E15 शामिल हों, और ये उचित कीमतों पर उपलब्ध हों। तीसरी बात, वे चाहते हैं कि सरकार E25 या E30 जैसे ज़्यादा इथेनॉल ब्लेंड की ओर बढ़ने का कोई भी कदम तब तक न उठाए, जब तक कि इसके लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर न बन जाए और कंज्यूमर व ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों समेत सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत न कर ली जाए


Tehseen Poonawalla ने क्या कहा?

पूनावाला ने कहा कि मिडिल क्लास को ठगा हुआ महसूस हो रहा है क्योंकि उनकी मेहनत की कमाई इन गाड़ियों को खरीदने में लगी है। इथेनॉल ब्लेंडिंग को गलत तरीके से लागू करना ही वह वजह है जिससे लोग बाहर आ रहे हैं।

केंद्र सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने (ब्लेंडिंग) की प्रक्रिया को लगातार बढ़ा रही है। इसकी रणनीति है कि कच्चे तेल का आयात कम किया जाए, ऊर्जा सुरक्षा बेहतर हो, प्रदूषण कम हो और गन्ने व अनाज से बनने वाले इथेनॉल की मांग बढ़ाकर किसानों की आय बढ़ाई जाए।


विवाद क्यों बढ़ा?

हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि कई मौजूदा गाड़ियां शुरू में E20 फ्यूल के लगातार इस्तेमाल के लिए नहीं बनाई गई थीं। उनका दावा है कि इथेनॉल की मात्रा ज़्यादा होने से फ्यूल की क्षमता (माइलेज) कम हो सकती है, पुरानी गाड़ियों के इंजन के पुर्ज़ों पर असर पड़ सकता है और लंबे समय में रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है।


राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज

E20 फ्यूल पॉलिसी को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
कांग्रेस और AAP ने भी E20 को लागू करने पर सवाल उठाए हैं। AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के सामने माना था कि E20 फ्यूल एक “प्रयोग” है। उन्होंने सवाल किया कि इसे सीमित संख्या में गाड़ियों पर टेस्ट करने के बजाय पूरे देश के लिए अनिवार्य क्यों कर दिया गया।

पूनावाला ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह उपभोक्ताओं की चिंताओं पर ध्यान देने के बजाय उन्हें नज़रअंदाज़ कर रही है। उन्होंने शुक्रवार को पुरी द्वारा दिए गए बयानों की आलोचना की। पूनावाला ने इथेनॉल के बचाव में हरदीप पुरी के बयानों की कड़ी आलोचना की और दावा किया कि सरकार “सब कुछ बेशर्मी से कर रही है”।


अगर अनुमति नहीं मिली तो क्या होगा?

यह देखना बाकी है कि दिल्ली पुलिस रविवार को होने वाली सभा के लिए अनुमति देगी या नहीं। लेकिन जगह चाहे जो भी हो, इस प्रदर्शन का मकसद भारत की इथेनॉल-ब्लेंडिंग पॉलिसी का विरोध करना है। यह पहला संगठित सड़क-स्तर का विरोध है जो इस पॉलिसी के खिलाफ है। इससे पता चलता है कि ऑनलाइन शुरू हुई बहस अब सार्वजनिक विरोध का रूप ले रही है।इस आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि वे उपभोक्ताओं की आवाज को और मजबूत करने के लिए आगे बढ़ेंगे। अगर सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो यह विरोध और भी बड़े स्तर पर फैल सकता है।


प्रदर्शनकारियों की तीन प्रमुख मांगें

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।पहली मांग है कि इथेनॉल-ब्लेंडिंग पॉलिसी को तुरंत वापस लिया जाए, क्योंकि यह पर्यावरण और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। दूसरी मांग में वे उचित मूल्य पर ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कर रहे हैं, जबकि तीसरी मांग में सरकार से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास में तेजी लाए।

1. सभी तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं

E20 ब्लेंडिंग से जुड़ी सभी पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स और टेक्निकल स्टडीज़ जनता के सामने रखी जाएं ताकि लोग तथ्यों को समझ सकें।यह कदम पारदर्शिता को बढ़ावा देने और नागरिकों को सही जानकारी प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से लोग सरकार की नीतियों और उनके प्रभावों के बारे में जागरूक हो सकेंगे, जिससे एक स्वस्थ संवाद स्थापित हो सकेगा।

2. फ्यूल का विकल्प मिले

ग्राहकों को केवल E20 ही नहीं, बल्कि E5, E15 और Ethanol-Free Petrol जैसे विकल्प भी उचित कीमत पर उपलब्ध कराए जाएं।इससे न केवल ग्राहकों को विभिन्न विकल्पों का लाभ मिलेगा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक सिद्ध होगा। इसके साथ ही, सरकार को ईंधन की कीमतों में स्थिरता लाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

3. E25 और E30 लागू करने में जल्दबाजी न हो

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार न हो जाए और सभी स्टेकहोल्डर्स से चर्चा न हो, तब तक E25 या E30 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण लागू नहीं किए जाने चाहिए।इस प्रकार, सही योजना और प्रक्रिया के तहत ही इन विकल्पों को लागू करना चाहिए, ताकि सभी हितधारकों की चिंताओं का समाधान किया जा सके। इसके अलावा, नागरिकों को जागरूक करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाना भी आवश्यक है, ताकि वे इन विकल्पों के लाभों को समझ सकें और उनका सही उपयोग कर सकें।

Harsh Kala

Harsh Kala एक automobile content writer और EV enthusiast हैं, जो Indian electric scooter और car market पर research-based, easy-to-understand content लिखते हैं। उनका focus Indian buyers को सही और practical vehicle choice में मदद करना है।

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